कृष्ण की लीलाओं की कथा अनन्त और अपरम्पार – विमल चैतन्य

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कृष्ण की लीलाओं की कथा अनन्त और अपरम्पार – विमल चैतन्य

(युगाधार समाचार )

सीतापुर- शहर के मोहल्ला इस्माइलपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सांतवे दिन कथा व्यास विमल चैतन्य जी महाराज ने कन्हैया के 16108 पटरानियों से विवाह प्रसंग एवं सुदामा से उनकी मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। कथाव्यास ने कहा कि कृष्ण की लीलाओं की कथा अनन्त और अपरम्पार है। उनके प्रेम के सागर में जो गोते लगाता है बिहारी जी उसे अपना बना लेते हैं। वृंदावन की गलियां इस प्रेम की साक्षी है।
कथा के छठवें दिन कथाव्यास विमल चैतन्य जी महाराज ने कृष्ण रुक्मिणी के मंगल विवाह का मनोहारी चित्रण किया। इससे पूर्व उन्होंने देवर्षि नारद द्वारा रुक्मिणी को बताए गए कृष्ण की विशेषताओं का ज़िक्र किया औऱ उसके परिणामस्वरूप रुक्मिणी माता द्वारा कृष्ण को पति के रूप में स्वीकार किये जाने के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर झांकी के माध्यम से कृष्ण रुक्मिणी का सुंदर पाणिग्रहण संस्कार कराया गया और फिर उपस्थित श्रद्धालुओं ने उन्हें अपनी भेंट प्रदान की।
कथा के सांतवे दिन शनिवार को नारद भक्ति आश्रम के पीठाधीश्वर विमल चैतन्य जी महाराज ने गुरु और गणेश वंदना के उपरांत कथा का शुभारंभ किया। ततपश्चात उन्होंने नित्यप्रति की भांति भजन प्रस्तुत किया। इसके उपरांत कथाव्यास ने श्रीकृष्ण के साथ जामवती के साथ विवाह औऱ फिर रुक्मिणी माता द्वारा श्राप स्वरूप दिये गए आशीर्वाद से उन्हें सुंदरता प्राप्त होने के प्रसंग का वर्णन किया। कथाव्यास ने इसी कड़ी में पहले श्रीकृष्ण के आठ विवाह और फिर बन्दीगृह में रखी गई 16100 कन्याओं द्वारा पति के रूप में भगवान श्रीकृष्ण को स्वीकार किये जाने का प्रसंग सुनाया।
कथाव्यास ने आगे सुदामा से कृष्ण की मित्रता का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि संदीपन ऋषि के आश्रम में कृष्ण और सुदामा की जो मित्रता प्रारम्भ हुई थी वह श्रीकृष्ण के द्वारिकाधीश बनने के बाद भी किस तरह अटूट कायम रही, उसकी भी एक मिसाल कायम हुई। कथाव्यास ने सुदामा के समर्पण और श्रीकृष्ण के वात्सल्य का जिक्र करते हुए बताया कि भगवान किस तरह अपने मित्र की दीनहीन दशा से भावविभोर होकर उसे अपने गले लगाते हैं। इस कार्यक्रम का समापन फूलों की होली के बाद आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
उन्होंने मेरा दिल दीवाना हो गया, वृंदावन की गलियों में, हमसे रूठो न बिहारी तुम्हे राधा की कसम भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को हाथ उठाकर ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। कथा में समाजसेवी नीरज जैन, भजन गायक अनुराग रोशन, भाजपा मीडिया प्रभारी पवन सिंह शिल्पी, वरिष्ठ पत्रकार राम दयाल अवस्थी, विनय मिश्रा, राजेश मिश्रा, कवि अरुणेश मिश्रा, रजनीश मिश्रा, सिद्धार्थ अवस्थी राज, प्रणीत सिंह, आदि ने प्रमुख रूप से उपस्थित होकर भक्ति रस का आनन्द लिया।
आचार्य मंडली में आचार्य राजेश तिवारी, पंडित गणेश शास्त्री, शिवदत्त तिवारी (अमन जी) एवं अंकित तिवारी जी शामिल रहे जबकि संगीत मंडली में प्रमोद त्रिवेदी (गायन), अभिलाश शर्मा (तबला), अजय चौधरी (बैंजो ऑर्गन), चंद्रकांत जी (ढोलक) एवं सोनू जी (पैड) पर अपने वाद्ययंत्रो के माध्यम से सहयोग कर भक्ति भाव की इस महफ़िल को सजाते रहे।
देर शाम तक कथापाण्डल मे भक्ति रस की धारा प्रवाहित हो रही थी। कथा यजमान नीरज श्रीवास्तव ललित श्रीवास्तव चंचल एवं रामसरन गुप्ता ने सातों दिन निरन्तर वेदी पर विधिवत पूजन पाठ किया और व्यासपीठ की परिक्रमा कर सभी के मंगलमय जीवन एवं जीव के कल्याण की बिहारी जी से प्रार्थना की।

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