आस्था की 84 कोसीय परिक्रमा — नवम पड़ाव

Share this

आस्था की 84 कोसीय परिक्रमा — नवम पड़ाव

( युगाधार समाचार )
सीतापुर -प्रतिपदा से परिक्रमा यात्रा आरम्भ हुई थी ,सामान्य तौर पर परिक्रमार्थी मिश्रीख को मिलाकर कुल 11 पड़ावो की गड़ना करते है ,लेकिन अगर पौराणिक तौर पर देखा जाये तो प्रतिपदा से आरम्भ होकर आज नवमी तक कुल 9 पड़ावो की संतो द्वारा परिक्रमा नैमिष क्षेत्र की की जाती है और मिश्रीख मे पांच दिनों तक पंच कोसीय परिक्रमा स्थल पर 84 कोसीय परिक्रमा करने वाले संत पड़ाव करते है और आम लोग ,गृहस्थ ,वनप्रस्थी जो भी 84 कोस की परिक्रमा नही कर पाते वो ये परिक्रमा करने वाले संत महात्माओं की मिश्रीख मे परिक्रमा करके वही पुण्य लाभ प्राप्त करते है ,
बीती रात जरिगवा मे पड़ाव करने के बाद आज सुबह मौनेश्वर तीर्थ मे मौन रहकर स्नान करके रामादल अपने आज के गँतव्य के लिए निकल पड़ा ,गहन वन क्षेत्रो से होती हुई ये यात्रा नगवा जयराम पहुँचती है ,माना जाता है अदिकाल मे ये स्थल नागराज की राजधानी हुआ करती थी ,और जन्मेजय के नाग यज्ञ के उपरांत नागो ने इसी वन क्षेत्र मे अपनी राजधानी स्थापित कर नागवंश का विस्तार किया ,मार्ग के कई तीर्थो और मंदिरो से होती हुई परिक्रमा गयावर्त्त तीर्थ पहुँचती है ,मान्यता है कि गया तीर्थ का पड़ाव स्थल यही था ,यहा अत्यंत प्राचीन मंदिर है ,अगर भौगोलिक दृष्टि से देखे तो भी ये नैमिष के पूर्व मे ठीक गया तीर्थ की दिशा मे ही पड़ता है ,रामादल यहा से आगे बढ़कर नैमिष मूल गाँव के क्षेत्र मे प्रवेश करता है ,और सबसे पहले “अयोध्या ” तीर्थ पहुँचता है ,यहा हनुमान जी का अति प्राचीन मंदिर है जो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा करते प्रतीत होते है ,जैसे अयोध्या जी मे हनुमान जी पूरी अयोध्या की रक्षा करते है उसी तरह यहा भी हनुमान जी काफी ऊंचाई पर है (मंदिर का विस्तृत विवरण जेठ माह के मंगल के दौरान )यहा से “चित्रकूट ” स्थल के दर्शन कर परिक्रमार्थी महर्षि वेद व्यास की साधना स्थली जहा उन्होंने सारा वैदिक ज्ञान लिपिबद्ध किया ,उस व्यास गद्दी और प्राचीन वत वृक्ष का पूजन अर्चन कर मनु सतरूपा की तपोस्थली के भी दर्शन करते है जो सृष्टि के आरम्भ और रामजन्म की कारक बनी ,यहा के बाद रामादल अपने निर्धारित स्थलों पर् कैंप कर गोमती राजघाट होते हुए दक्षिणमुखी हनुमान जी के हनुमान गढ़ी मे दर्शन करते है ,मान्यता है अहिरावण का वध कर हनुमान जी वहा से राम लक्ष्मण को मुक्त कराकर यहा प्रकट हुए और यही विश्राम् कर लंका की तरफ गये ,पूरे देश मे इस तरह की तीन हनुमानगढी के दर्शन् होते है ,अयोध्या मे बैठे ,प्रयाग मे लेटे और नैमिष मे खड़े हनुमान जी ,हनुमान जी की ये मूर्ति अत्यंत विशालकाय है ,यही पर् रामादल “पांडव किला ” के भी दर्शन करते है जहा पांडवो ने वन का समय गुजारा था ,शाम होते होते रामादल रामानुज कोट मंदिर मे एकत्र होता है और वहा से भगवान नैमिष नाथ और चक्रतीर्थ की भव्य यात्रा आरम्भ होती है ,जो पूरे नगर का भ्रमण करते हुए नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए चक्र तीर्थ पहुँचती है ,मार्ग मे जगह जगह रामादल का भव्य स्वागत और नैमिष नाथ की आरती होती है ,इस दौरान श्री ललिता आश्रम पर् मा ललिता देवी के प्रधान पुजारी लाल बिहारी और श्री बूढ़े बाबा आश्रम डेंगरा की तरफ से मेरे द्वारा स्वागत किया गया ,
चक्रतीर्थ पर् यात्रा और परिक्रमार्थियों के स्वागत मे विविध आयोजन हुए ,और अष्ट कोणीय आरती भी हुई ,इस दौरान चक्रतीर्थ की शोभा देखते ही बनती थी ,रामादल ने चक्र तीर्थ पर नैमिष के कोतवाल श्री भूतेश्वर नाथ के दर्शन किये ,यहा शिवलिंग प्रतिमा स्वरुप् मे है जो दिन मे तीन बार अपना स्वरुप बदलता है ,
आज की रात नैमिष मे पड़ाव अवश्य है ,लेकिन नैमिष के कई स्थलों के दर्शन अभी अगले पड़ाव के पहले करने है कल सुबह चक्रतीर्थ मे स्नान कर मा ललिता देवी के दर्शन् कर रामादल आगे की यात्रा पर बढ़ेगा ,आज की रात नैमिष की पवित्र धरा पर

यह भी पढ़ें :  प्रभु से बढ़कर कोई और सुख और सम्पदा नहीं, भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव होता है कल्याण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *