आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों भर्ती घोटाले की कॉल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल

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आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों भर्ती घोटाले की कॉल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल

👉आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री चयन में भ्रष्टाचार एवं ब्लैकमेलिंग का मामला उजागर

(युगाधार समाचार)

सीतापुर-ग्राम जजौर, पोस्ट अटरिया, तहसील सिधौली की निवासी कु० शीला देवी द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रेषित एक लिखित शिकायत में आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, उन्होंने अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत इस पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान उनसे रिश्वत मांगी गई और असहमति जताने पर उनका चयन रोक दिया गया। कु० शीला देवी ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि 21 फरवरी 2025 को उन्हें सिधौली बाल विकास परियोजना कार्यालय से पूनम द्विवेदी (बाबू) द्वारा फोन कर बुलाया गया था। वहां उनके सभी प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया गया, लेकिन चयन सुनिश्चित करने के लिए तीन लाख रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने इस मांग को अस्वीकार कर दिया, तो उन्हें बताया गया कि किसी अन्य महिला को चयनित कर लिया जाएगा। इसके बाद 24 फरवरी को सीतापुर C.D.P.O कार्यालय में उनके दस्तावेजों का सत्यापन करने से इनकार कर दिया गया।
आरोप है कि पूनम द्विवेदी द्वारा 2 मार्च से 6 मार्च 2025 तक कई बार फोन कर रिश्वत देने का दबाव बनाया गया। जब कु० शीला देवी ने धनराशि देने से इंकार कर दिया, तो उनका चयन नहीं किया गया, जबकि वे अपनी ग्राम पंचायत की एकमात्र पात्र उम्मीदवार थीं। 20 मार्च 2025 को पूनम द्विवेदी ने फोन कर स्पष्ट रूप से कहा कि बिना पैसे दिए किसी का चयन नहीं हुआ है। शिकायत में यह भी बताया गया कि 25 मार्च 2025 को रात 10:26 बजे उनके और उनके मौसी के लड़के के फोन नंबर पर अज्ञात फोटो भेजी गईं, जो मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग का संकेत देती हैं। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और CCTV फुटेज निकलवाने की बात कही, तो उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। कु० शीला देवी ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि उनके पिता हृदय रोगी हैं और ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित हैं, जबकि उनकी पारिवारिक वार्षिक आय मात्र ₹42,000 है। इस स्थिति में रिश्वत देना संभव नहीं था, और उन्होंने न्याय की उम्मीद में मुख्यमंत्री से इस मामले में कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के भ्रष्टाचार और महिलाओं के शोषण की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में सत्यापन सूची की प्रति, कॉल रिकॉर्डिंग के स्क्रीनशॉट और प्राप्त फोन कॉल एवं मैसेज के विवरण भी संलग्न किए हैं। यह मामला प्रदेश की सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि शीघ्र ही इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रशासनिक तंत्र पर जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है।

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