गांव की गोद में खिलती ‘शिक्षा की बगिया‘-शिक्षिका मीना दुबे बनीं प्रेरणा की मिसाल

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गांव की गोद में खिलती ‘शिक्षा की बगिया‘-शिक्षिका मीना दुबे बनीं प्रेरणा की मिसाल

(युगाधार समाचार)

सीतापुर -जनपद के सिधौली विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय गंगापुर में कार्यरत शिक्षिका श्रीमती मीना दुबे आज एक ऐसे शिक्षण मॉडल की प्रतिमूर्ति बन चुकी हैं, जहाँ शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, व्यवहारिकता और संस्कारों का समग्र समावेश है।
ग्रामीण परिवेश में स्थित इस विद्यालय में शिक्षिका मीना दुबे जिस लगन, सृजनात्मकता और करुणा के साथ बच्चों को शिक्षित कर रही हैं, वह प्रशंसनीय ही नहीं, अनुकरणीय भी है। वे बच्चों को न केवल पाठ्यक्रम की जानकारी देती हैं, बल्कि उनकी गतिविधियों में खेल, योग, नैतिक शिक्षा, पर्यावरणीय चेतना और पारिवारिक संस्कारों का ऐसा समावेश करती हैं, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
श्रीमती मीना दुबे की शिक्षण पद्धति में एक खास बात यह है कि वे पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम बनाती हैं। बच्चे उनके साथ कहानी, कविता, चित्रकला, समूह चर्चा और नाट्य रूपांतरण जैसी सृजनात्मक गतिविधियों में भाग लेते हैं। उनका मानना है कि “बच्चों को पाठ रटवाने से बेहतर है कि उन्हें अनुभवों से जोड़कर सिखाया जाए।
एक ग्रामीण स्कूल में कार्यरत होते हुए भी श्रीमती दुबे की सोच और दृष्टिकोण अत्यंत प्रगतिशील है। वे विद्यालय को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रयोगशाला मानती हैं। विद्यालय में पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, बाल सभा जैसी गतिविधियां उनके प्रयासों से नियमित रूप से संचालित होती हैं। इन प्रयासों से बच्चों में जिम्मेदारी, नेतृत्व और सामाजिक सहभागिता की भावना विकसित हो रही है।
श्रीमती मीना दुबे को स्थानीय समुदाय, अभिभावकों और शिक्षा अधिकारियों से भरपूर सराहना मिली है। उनके कार्यों को ब्लॉक स्तर की बैठकों और शिक्षक प्रशिक्षणों में ‘‘बेस्ट प्रैक्टिसेज़‘‘ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वे न केवल एक आदर्श शिक्षिका हैं, बल्कि एक प्रेरक नेतृत्वकर्ता भी हैं।
ऐसे समय में जब शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और नवाचार की आवश्यकता बार-बार रेखांकित की जा रही है, श्रीमती मीना दुबे जैसी शिक्षिका समाज के लिए उम्मीद की किरण हैं। वे सिद्ध कर रही हैं कि अगर नीयत सच्ची हो और दृष्टि व्यापक, तो एक शिक्षक अकेले भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है।
श्रीमती मीना दुबे वास्तव में शिक्षा के क्षेत्र में एक जीवंत प्रेरणा हैं, जिनसे आने वाली पीढ़ियाँ न केवल ज्ञान, बल्कि संस्कार और जागरूकता भी पाएंगी।

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