हमें अपने अधिकारों के लिए स्वयं सोचना होगा-पूर्व न्यायाधीश

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हमें अपने अधिकारों के लिए स्वयं सोचना होगा-पूर्व न्यायाधीश

(युगाधार समाचार)

सीतापुर – समाज का उत्थान तब तक संभव नहीं है जब तक लोग शिक्षित नहीं होंगे ।आज समाज आपस में लड़ता जा रहा है। इसको रोकने के लिए हम सभी को अपनी सोच बदलनी होगी। उक्त विचार उच्च न्यायालय के सेवानिवृत हाई कोर्ट के न्यायधीश वीरेंद्र सिंह यादव ने सामाजिक चेतना चौपाल एवं सामाजिक चेतना फाउंडेशन के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने आगे कहा हमें अपने अधिकारों के लिए स्वयं सोचना होगा। और अधिकारों को पाने के कर्तब्य करना पड़ता है ।
भारत के संविधान मे सभी वर्गों के लोगों को बराबरी का अधिकार दिया है। संविधान मे मिले अधिकारों के आधार पर समाज को चलना चाहिए। उन्होंने कहा अपनी सोच बदलकर ही आपस में भाईचारा बनाए रखना से ही समस्याओ का हल निकलेगा। उन्होंने कहा अदालतो मे जो हम वर्षो लड़ाई लड़ कर हासिल करते है।यदि हमारी ग्राम पंचायतें संविधान के अनुसार भाईचारे की भावना से काम करे तो हमे अदालतो के चक्कर लगाने से बचा जा सकता है। मात्र सोच बदलने की जरूरत है चीजे अपने आप बदल जाएगी। सामाजिक चेतना फाउंडेशन के द्वारा आयोजित सामाजिक चेतना चौपाल के कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मास्टर प्रमोद वर्मा ने कहा लोग अपने अधिकारों की ही बात नही करते बल्कि कर्तब्यो का भी पालन करते है। सामाजिक चेतना ही लोकतंत्र की आत्मा है। हर व्यक्ति को शिक्षा ,संवाद और सहभागिता के जरिये सामाजिक चेतना को अपनाना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक मोहम्मद साद व कोडिनेटर नूर नेता मुख्यतिथि का अंगवस्त्र मोमेंटो देकर स्वागत किया। कार्यक्रम को अधिवक्ता अवनीश यादव, महेंद्र यादव, आरएन सिंह ने भी संबोधित किया।
संचालन सामाजिक कार्यकर्ता हरीशंकर गुप्ता ने किया। अंत मे मोहम्मद साद ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कमलेद्र वाजपेई, शुभम रस्तोगी, अमर मेहरोत्रा, नीरज श्रीवास्तव, नईम अंसारी ,दिनेश कुमार श्रीवास्तव, फिरोज कौशर, बाबूराम वर्मा, संदीप यादव, उमर अंसारी, पंकज भारतीय, कलाम अहमद सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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