सीतापुर में पराली जलाने के कारण चार कृषकों पर लगा जुर्माना

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सीतापुर में पराली जलाने के कारण चार कृषकों पर लगा जुर्माना

(युगाधार समाचार )

सीतापुर -उप कृषि निदेशक, डा० एस० के सिंह द्वारा बताया गया कि जनपद के चार कृषकों द्वारा पराली जलाने की घटना घटित की गयी जिस पर गठित समिति (ग्राम प्रधान, राजस्व लेखपाल एवं प्राविधिक सहायक) द्वारा संयुक्त आख्या नियमानुसार कार्यवाही हेतु तहसील को भेज दिया गया है,
जिन किसानो पर मुकदमा दर्ज कराया गया है उसमे किसान सतेन्द्र कुमार पुत्र बाबूराम नि0 ग्राम आलमपुर विकासखण्ड – रामपुर मथुरा तहसील महमूदाबाद,बरकत पुत्र अब्दुल्ला, नि० ग्राम रूदाइन ( रसूलाबाद), विकासखण्ड एवं तहसील महमूदाबाद,शिवरतन पुत्र लालजी, नि०-ग्राम-डफरा, विकासखण्ड – रामपुर मथुरा तहसील महमूदाबाद,जाबिर पुत्र असगर, नि0 ग्राम लालपुर विकासखण्ड एवं तहसील महमूदाबाद है!

वहीं कृषि निदेशक ने किसानो से अपील है कि फसल अवशेषों (पराली) कदापि न जलाये बलकि इसे भूमि में मिलाकर भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ायें तथा फसल अवशेष जलाये जाने से हो रहे प्रदूषक की रोकथाम करें। जनपद प्रशासन ने एक बार फिर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कमर कस ली है।
कृषि विभाग द्वारा न्याय पंचायत स्तर पर जागरूकता गोष्ठियाँ आयोजित कर कृषकों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के साथ ही पराली प्रबंधन के लाभ बताए जा रहे हैं।
कृषकों के बीच जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पराली प्रबंधन जागरूकता प्रचार वाहनों के माध्यम से भी कृषकों को जागरूक किया जा रहा है। यह प्रचार वाहन सभी विकास – खंडों के ग्रामीण क्षेत्रों में घूम-घूमकर पराली जलाने से होने वाले दुष्परिणामों और फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों का प्रचार-प्रसार कर कृषकों को जागरूक कर रहे है। हर प्रचार वाहन के साथ कृषि विभाग के एक कर्मचारी को भी लगाया गया है।
हाल के वर्षों में श्रमिकों की उपलब्धता में कमी की वजह से कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई का प्रचलन बढ़ा है। कम्बाइन से कटाई के बाद अवशेषों को को खेत में मिला देने के लिए जनपद में सभी कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकों को सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाए जाने को अनिवार्य कर दिया गया है। कम्बाइन हार्वेस्टर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम न लगाने पर कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही की जायेगी।

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उप कृषि निदेशक द्वारा बताया गया कि “खेतों में पराली या अन्य फसल अवशेष जलाकर किसान भाई अपना ही नुकसान करते हैं क्योंकि इससे मृदा का ताप बढ़ने के कारण मित्र कीट, सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं भूमि की जलधारण क्षमता और उपजाऊपन घटता है जिसका सीधा प्रभाव उत्पादन पर पड़ता है। किसान भाइयों को पराली जलाने से होने वाले नुकसानों के बारे में जागरूक किया जा रहा है, किसान भाइयों को निःशुल्क बायो- डिकम्पोजर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है इसके साथ ही फसल अवशेष को कैसे उपयोगी बनाया जाए इस संबन्ध में हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है” ।

जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि “वर्तमान में हमारी जमीन को जैविक खादों की आवश्यकता है जिससे मृदा संरचना में
सुधार हो और उत्पादन में वृद्धि हो सके ।
फसल अवशेषों का प्रयोग कम्पोस्ट तथा अन्य जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) द्वारा विकसित बायो- डिकम्पोजर के प्रयोग से जैविक खाद बनाना अधिक आसान हो गया है । खेत में पड़े फसल अवशेषों पर बायो- डिकम्पोजर का प्रयोग कर किसान भाई इसे खेत में ही डिकम्पोज कर (सडा)सकते हैं अथवा पैडी स्ट्राचापर, श्रेडर, मल्चर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिक रिवर्सेबल एम. बी. पलाऊ, सुपर सीडर, बेलर, सुपर स्ट्रा, मैनेजमेंट सिस्टम यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों को खेत में मिला सकते है । इससे भूमि की दशा में सुधार होता है और उत्पादन बढ़ता है”। मा० सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में पराली जलाये जाने पर पूर्णतया रोक लगाते हुये जुर्माने के तौर पर 2 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों से रू0 – 2500 / – का जुर्माना प्रति घटना! 2 से 5 एकड़ भूमि वाले किसानों से रू0-5000/- का जुर्माना प्रति घटना 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों से रू0 15000 / – का जुर्माना प्रति घटना | उन्होंने बताया कि जुर्माने से बचने के लिये किसान पराली जलाकर अपना ही नुकसान न करें बल्कि उसे खेतों में मिलाकर भूमि की उर्वराशक्ति को बढ़ायें।

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