आजादी के 75 साल बाद भी नहीं जारी हो पा रहा तहसील से जाति प्रमाण पत्र

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आजादी के 75 साल बाद भी नहीं जारी हो पा रहा तहसील से जाति प्रमाण पत्र

(युगाधार समाचार )

सीतापुर -जनपद के तहसील महमूदाबाद के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मितौरा के गुड़ियापुर में सैकड़ो वर्षों से निवास कर रहे अति गरीब, नाच-गाना, बजाना करके अपना जीवन यापन करने वाले ज्यादातर भूमिहीन हैं जिन्हें मंगता/बजनिया जाति के नाम से जाना जाता है उन्हे आजादी के बाद अब तक जाति प्रमाण पत्र तहसील से नहीं मिल पा रहा है।
जहां देश एक तरफ आजादी का 75 वा वर्ष अमृत महोत्सव के रूप में मना रहा है वहीं इस ग्राम पंचायत के मंगता जाति के सैकड़ो लोग आज भी अपनी जाति का प्रमाण पत्र तक नहीं बनवा पा रहे हैं।
मंगता जाति के यह मूल निवासी जब जब विद्यालय में बच्चों के नामांकन हेतु जाते हैं और वहां उनसे जाति का प्रमाण पत्र मांगा जाता है तब वह अपनी जाति का प्रमाण पत्र नहीं दे पाते हैं और बच्चों के नामांकन में परेशानी तो होती ही है उनके बच्चे अशिक्षित रहकर अपना जीवन जीने को मजबूर है।
इसी समस्या को लेकर मौजूदा युवा ग्राम प्रधान आलोक श्रीवास्तव द्वारा व्यक्तिगत रूप से मिलकर जिलाधिकारी सीतापुर को इस प्रकरण के बारे में अवगत कराया था तथा पूर्व में आई जी आर एस पर जाति प्रमाण पत्र जारी न करने पर की गई शिकायत पर तहसील द्वारा लगाई गई रिपोर्ट्स की प्रतियां भी संलग्न करके जाति प्रमाण पत्र तहसील से जारी करने हेतु प्रार्थना पत्र दिया था उसी प्रार्थना पत्र पर जिलाधिकारी सीतापुर ने जांच के लिए आदेश जारी किया था कि उप जिलाधिकारी महमूदाबाद व्यक्तिगत रूप से स्वयं दिखवाकर प्रकरण को निस्तारित करवाएं परंतु इस आदेश को भी दर किनार करते हुए तहसील से बिना उपजिलाधिकारी के हस्ताक्षर के सामान्य रूप से रिपोर्ट लगाकर खानापूरी कर दी गई और कोई भी कार्रवाई जमीनी स्तर पर नहीं की गई। और लेखपाल द्वारा पुनः रिपोर्ट लगा दी गई की यह कार्य इस स्तर से संभव नहीं है जबकि मजेदार बात यह है कि इसी तहसील की ग्राम पंचायत रेवान के प्रधान भी मंगता जाति के हैं जिन्हें जाति प्रमाण पत्र तहसील से दिया गया होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब तो यह लोग बच्चों की पढ़ाई एवम सरकारी काम काज में जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता को देखते हुए मजबूरी में गुपचुप तरीके से अपनी जाति बदल करके अपना प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं ताकि कैसे भी काम बन जाए।
अब देखना यह है कि जहां मोदी-योगी सरकार गरीबों की मदद की बात करती है और वहीं पर 75 साल बाद भी मंगता बिरादरी को जाति प्रमाण पत्र तक जारी नही हो पाना अतिचिंतनीय विषय है।

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