तो क्या महेन्द्र सिंह यादव बिगाड़ सकते है भाजपा व गठबंधन का चुनावी खेल

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तो क्या महेन्द्र सिंह यादव बिगाड़ सकते है भाजपा व गठबंधन का चुनावी खेल

( युगाधार समाचार )

सीतापुर-भाजपा का झंडा बुलंद करने वाले बिसवां से भाजपा के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह यादव ने अपना नया राजनीतिक सफर अब बसपा की तरफ मोड दिया है ।
सूत्रों की माने तो पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह यादव इस कदम के संकेत कुछ दिनों पूर्व ही दे दिया था!
राजनीतिक पंडितों की माने तो महेंद्र यादव के बसपा में जाने से सीतापुर लोकसभा सीट से चुनावी गणित बदल सकती है। लोगों का मानना है कि महेंद्र सिंह यादव के बसपा से आने से भाजपा व गठबंधन का खेल बिगड़ सकता है। यहां बता दें कि सीतापुर की राजनीति में महेंद्र सिंह यादव का नाम अलग ही महत्व रखता है क्योंकि विधायक रहते व टिकट न मिलने से विधायकी से वँचित होने के बाउजूद वो हमेशा जनता व कार्यकर्ताओ के सुख दुख मे पहले पायदान पर खडे दिखाई दिये है ।
पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह यादव 2017 में बिसवां विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े। उन्होंने यह चुनाव जीता भी और बिसवां विधानसभा सीट से विधायक के रुप में भाजपा का नेतृत्व किया। उन्होंने ऐसा तब कर दिखाया, जब बिसवां की सीट सपा का गढ़ मानी जाती थी। बावजूद इसके वर्ष 2022 में जब फिर से विधानसभा चुनाव हुए, तब भाजपा ने महेंद्र सिंह यादव का टिकट काटकर निर्मल वर्मा को

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टिकट दिया। इसके बावजूद महेंद्र सिंह यादव भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे। इधर जब लोकसभा का चुनाव का बिगुल बजा, तो महेंद्र सिंह यादव लोकसभा सीट के लिए दावेदारी ठोंक रहे थे। जबकि भाजपा ने उन्हें दरकिनार करते हुए वर्तमान सांसद को ही देकर महेंद्र सिंह यादव को निराश कर दिया। तभी से यह सुगबुगाहट तेज हो गई, कि महेंद्र सिंह यादव भाजपा छोड़ देंगे। अब महेंद्र सिंह यादव खुद ही बता रहे हैं कि उपेक्षा के चलते भाजपा से उनका मोहभंग हो गया है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द ही बसपा से महेंद्र सिंह यादव लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंक सकते हैं। यदि ऐसा हुआ, तो सीतापुर लोकसभा सीट का चुनावी गणित बदल जाएगा। इधर महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बसपा से उनका टिकट लगभग तय है। इधर जानकारों का कहना है कि महेंद्र सिंह यादव के चुनाव मैदान में आने से भाजपा व गठबंधन का चुनावी खेल बिगड़ सकता है।

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