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सीतापुर का सबसे बड़ा जमीन घोटाला? 200 करोड़ की दान में मिली जमीन के 22 बैनामे जांच में हुवा बड़ा खुलासा
(युगाधार समाचार )
सीतापुर- जिले के सिधौली में स्थित गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज सिधौली से जुड़ा एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
जांच में पता चला है कि संस्था को दान में मिली करीब 30 एकड़ जमीन, जिसकी आज की बाजार कीमत लगभग 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, उसके 1973 से 2006 के बीच कुल 22 बैनामे (रजिस्ट्री) किए गए।
यह मामला सामने आने के बाद पूरे सीतापुर जिले में चर्चा का विषय बन गया है और प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। जानकर बताते है कि
यह जमीन मूल रूप से सेना के उपयोग में थी।
11 सितंबर 1967 को तत्कालीन राष्ट्रपति के आदेश से बहादुरपुर गांव में स्थित लगभग 30 एकड़ जमीन “सरकारी पड़ाव” के नाम से दर्ज सैन्य भूमि
को शिक्षा के उद्देश्य से गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज सिधौली को हस्तांतरित किया गया था।
इस जमीन का हस्तांतरण सरकारी अनुदान अधिनियम 1895 के तहत हुआ था और इसके बदले लगभग 23,690 रुपये का भुगतान किया गया था।
इस जमीन का उद्देश्य था कि शिक्षा संस्थान का विकास, विद्यालय की आर्थिक मजबूती,छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना।
जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय की प्रबंध समिति का पंजीकरण
24 जनवरी 1950 को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत किया गया था।
इस समिति को विद्यालय की संपत्तियों की देखरेख और संचालन का अधिकार था।
जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1973 से इस जमीन की रजिस्ट्री (बैनामे) शुरू हो गई थी।
बताया जा रहा है कि संस्था से जुड़े कुछ लोगों ने बिना सक्षम अनुमति के जमीन को अलग-अलग व्यक्तियों के नाम बेच दिया।
जांच में सामने आया है कि वर्ष 1973 से 2006 तक कुल 22 बैनामे किए गए
कई जमीनें अलग-अलग लोगों के नाम ट्रांसफर कर दी गईं कुछ जमीन दान पत्र के माध्यम से स्वयं के नाम कर ली गई।
जांच में कई लोगों के नाम सामने आए जिनके पक्ष में जमीन के बैनामे किए गए। इनमें प्रमुख रूप से तोताराम जैन, ताराचंद माहेश्वरी,रामपाल, विनय कुमार, जगदेव प्रसाद, हरिनाम सुंदर,नंद किशोर, गिरजा शंकर, जगमोहन लाल यादव , आदित्य प्रसाद मिश्र कुंवर दिवाकर सिंह आदि के नाम बताए गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि तोताराम जैन ने 9 अगस्त 1987 को सर्वोदय विद्यालय समिति का गठन किया, जिसके बाद जमीन के लेन-देन का सिलसिला और तेज हो गया।
रिपोर्ट के अनुसार 2003 में दान पत्र के माध्यम से कुछ जमीन स्वयं के नाम कर ली गई
2006 में शुद्धि पत्र के माध्यम से जमीन के स्वामित्व में बदलाव किया गया
इस तरह कई दशकों में धीरे-धीरे जमीन का बड़ा हिस्सा बेच दिया गया।
इस पूरे प्रकरण की शिकायत डॉ. कमल कुमार जैन ने 13 अगस्त 2025 को प्रशासन से की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दान में मिली जमीन को नियमों के विरुद्ध बेचा गया कई बैनामे संदिग्ध तरीके से किए गए।
इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए।
दो सदस्यीय जांच कमेटी बनी जांच के लिए एसडीएम सदर न्यायिक, उप निबंधक सिधौली
की दो सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी।
इस कमेटी ने पूरे मामले की जांच कर 8 बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। डीएम ने भेजी रिपोर्ट, कार्रवाई के संकेत
सीतापुर के जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने जांच रिपोर्ट
रक्षा संपदा कार्यालय सोसाइटी रजिस्ट्रार को भेज दी है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि —
मामले की विधिवत जांच हो चुकी है
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है
किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। यह मामला कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योकि जमीन मूल रूप से सेना की थी
इसे शिक्षा संस्थान के लिए दान में दिया गया था
इसकी कीमत अब लगभग 200 करोड़ रुपये बताई जा रही है
दशकों तक इस जमीन के लेन-देन पर सवाल उठते रहे।
अब जांच के बाद यह मामला पूरे जिले में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।












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