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भारत का एक ऐसा मंदिर जहां का प्रसाद घर नहीं लाया जाता दर्शन मात्र से दूर होती है बढ़ाएं
(युगाधार समाचार)
भारत में आज भी कई ऐसे मंदिर हैं, जो रहस्यों से भरे हुए हैं। हर मंदिर की अपनी एक गाथा और महत्त्व है। इन्हीं मंदिरों मे से एक है मेहंदीपुर बालाजी। राजस्थान के दौसा ज़िले में पहाड़ियों के बीच मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर स्थित है। यहां आपको कई विचित्र नज़ारे देखने को मिलेगें, जिन्हें पहली बार देख कर लोग हैरत में पड़ जाते हैं। यहां हर दिन, दूर-दूर से ऊपरी चक्कर और प्रेत बाधा से परेशान लोग मुक्ति के लिए आते हैं।
👉2 बजे लगता है दरबार
भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाओं के निवारण के लिए यहां आने वालों का तांता लगा रहता है। इस मंदिर में प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा की मूर्ति है। हर दिन 2 बजे प्रेतराज सरकार के दरबार में पेशी यानी कीर्तन होता है। जिसमें लोगों पर आए ऊपरी सायों को दूर किया जाता है।
👉इन चीज़ों को नहीं ले जा सकते घर
मान्यता है कि मेहंदीपुर बालाजी के किसी भी तरह के प्रसाद को आप खा नहीं सकते और ना ही किसी को दे सकते हैं। यहां के लोगों का मानना है कि यहां जो भी खाने-पीने की चीज़, सुंगधित चीज़ या प्रसाद मिलता है, उसे आप घर नहीं ले जा सकते हैं। बताया जाता है कि ऐसा करने से ऊपरी साया आपके साथ आ जाता है।
👉बायीं छाती पर छेद
कहते हैं कि मेहंदीपुर बालाजी की बायीं छाती में एक छोटा सा छेद है जिसमें से लगातार जल बहता रहता है। कहते हैं कि यह बालाजी का पसीना है। यहां बालाजी को लड्डू, प्रेतराज को चावल और भैरो बाबा को उड़द का प्रसाद चढ़ता है।
मान्यता है कि जिनके अंदर भूत-प्रेत आदि शक्तियां होती हैं, वो इस प्रसाद को खाते ही अजब-ग़ज़ब हरकतें करने लगते हैं।
भक्त करते हैं यह नियम पालन
मेहंदीपुर बालाजी की मूर्ति के ठीक सामने भगवान राम-सीता की मूर्ति है। जिसके बालाजी हमेशा दर्शन करते हैं। यहां हनुमान जी बाल रूप में मौजूद हैं। यहां आने वाले सभी यात्रियों के लिए नियम है कि उन्हें कम से कम एक सप्ताह तक लहसुन, प्याज़, अंड़ा, मांस, शराब आदि का सेवन बंद कर देना चाहिए।
👉2 तरह का मिलता है प्रसाद
यहां बाक़ी मंदिरों की तुलना में अलग प्रसाद चढ़ता है। यहां प्रसाद दो तरह का चढ़ाया जाता है, एक दर्खावस्त और दूसरा अर्ज़ी के रूप में चढ़ाया जाता है।
हाज़िरी का प्रसाद दो बार ख़रीदना पड़ता है और अर्ज़ी में 3 थालियों में प्रसाद मिलता है। मंदिर में दर्खावस्त एक बार लगाने के बाद, वहां से तुरंत निकल जाना होता है। अर्ज़ी का प्रसाद लौटते समय लेते हैं, जिसे अपने पीछे फेंकना होता है। नियम है कि प्रसाद फेंकते समय पीछे नहीं देखना चाहिए।(साभार सोसल मीडिया)












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